Shayari
वफ़ा का वादा तो
वफ़ा का वादा तो करता है हर कोईफिर भी ज़माने मे बेवफाई हुआ करती है..साथ देना का वादा तो करता है हर कोईफिर भी ज़माने मे तन्हाई हुआ करती है…
Shayari
अक्सर अल्फाज़ो मे
अक्सर अल्फाज़ो मे भी हुनर नहीं होता आरज़ू बयान करने का…महज़ निगाहों का नूर ही अनकहे सारे जज़्बात कह देता है ।
Shayari
छलावा ज़माने का अब
छलावा ज़माने का अब मज़ाक लगता है,अपनों ने ही जब लूटा हमें तो बड़े से बड़ा लूटेरा भी अब बेचारा लगता है…
Shayari
ना जाने क्यों मगर
ना जाने क्यों मगर वो बात अधूरी ही रह जाती है,जज़्बातों के आगोश मे नींद अधूरी ही रह जाती है।